एक दीया-बाती, हज़ारों रोशनी
घुल-घुल जाए हवा में चाशनी

एक दीया-बाती, हज़ारों रोशनी
घुल-घुल जाए हवा में चाशनी
है सेवा का जुनून, क्या छोटा, क्या बड़ा
कुछ कर गुज़रने का फ़ितूर जब चढ़ा

तूने है सिखाया, हो-हाँ
धूप में है छाया, हो-हाँ
तूने है सिखाया, हो-हाँ
धूप में है छाया, हो-हाँ
एक सोच है जागी, जागी धरती के लिए
एक जोत है जागी, जागी प्रकृति के लिए
एक सोच है जागी, जागी धरती के लिए
एक जोत है जागी, जागी प्रकृति के लिए

नदिया, पर्वत, सागर, बादल, चारों दिशाएँ
बहती, गाती, मदमाती ये अल्हड़ हवाएँ

बल खाती आती तरंगें, ये लहरें, किनारे
चमके पेड़, पत्ते, बूँदें, झिलमिल सितारे
तूने जो बताया, हो-हाँ
बोया तो फल पाया, हो-हाँ
है सेवा का जुनून, क्या छोटा, क्या बड़ा
कुछ कर गुज़रने का फ़ितूर जब चढ़ा
एक सोच है जागी, जागी धरती के लिए
एक जोत है जागी, जागी प्रकृति के लिए
एक सोच है जागी, जागी धरती के लिए
एक जोत है जागी, जागी प्रकृति के लिए
एक दीया-बाती, हज़ारों रोशनी
घुल-घुल जाए हवा में चाशनी