है भारत जिसका नाम
घरो मेउतव उगते है
यही हैपावन धरा हंस
जहाँ मोती चुगते है

है भारत जिसका नाम
घरो मे उतव उगते है
यही है पावन धरा हंस
जहाँ मोती चुगते है

परवत झूम रहे
नदियाँ नाच रही
घर घर थाल कटोरी मटकी ढोलक बाज रही

कोने कोने रत जड़े
पान पान गुणवन खड़े

इतिहास मे पहली बार नये भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश

है खुलने को तैयार मेरे भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश

उनतो का यह देश यहाँ
पग पग मिलते है साधक
एक से बढ़ कर एक है अचरज
दषि जाये जहॉ तक

इतिहास मे पहली बार नये भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश
पाने को सबका पार मेरे भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश

हो बोली ठिठोली अलग अलग
संगीत एक हो जाता है
अमृत की सुगन बहते ही है
सुर मे सुर मिल जाता है

इतिहास मे पहली बार नये भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश
आ रहा है पहली बार नये भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश

अजब रंग का एक भारत गज़ब ढंग का शेष भारत
नाना पुष सुगन सुसजित माला एक विशेष भारत

परवत झूम रहे
नदियाँ नाच रही
घर घर थाल कटोरी मटकी ढोलक बाज रही

कोने कोने रत जड़े
पान पान गुणवन खड़े

इतिहास मे पहली बार नये भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश
है खुलने को तैयार मेरे भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश
इतिहास मे पहली बार नये भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश
है खुलने को तैयार मेरे भारत का
अमृत कलश अमृत कलश अमृत कलश